छठी मईया, सुन लो पुकार, तेरे चरणों में संसार
डूबते सूरज को अर्घ्य चढ़ाएँ, उगते सूरज से जीवन पाएँ। छठी मईया की भक्ति में झुकता है आज पूरा हिंदुस्तान। आइए, इस पावन पर्व पर खुशियों का संसार सजाएँ।
पर्व का समय
संध्या अर्घ्य: सूर्यास्त समय
उषा अर्घ्य: सूर्योदय समय
पावन घाट
नदी का किनारा,
समस्त पवित्र घाट
छठ महापर्व का मर्म
छठी मईया, सुन लो पुकार, तेरे चरणों में संसार
छठ महापर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, त्याग और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है। डूबते सूरज को अर्घ्य देकर हम जीवन के चक्र को स्वीकार करते हैं और उगते सूरज से नई ऊर्जा पाते हैं।
पावन परंपरा
नदी किनारे, हाथ में दउरा और माथे पर सिंदूर की पावन परंपरा का निर्वहन।
प्रकृति पूजन
डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना।
सामाजिक एकता
जाति-धर्म की दीवारें भूलकर आज दिल मिले हैं हाथों से हाथ मिलाकर।
लोक आस्था
हर आँगन में खुशियों की बहार और हर माँ की गोद में सुख का संसार।

संध्या अर्घ्य: डूबता सूरज
नदी किनारे दीप जलाकर अर्घ्य अर्पण।
उषा अर्घ्य: उगता सूरज
भोर की बेला में जीवन का नया उजियारा।
चार दिवसीय पावन अनुष्ठान
छठी मईया की भक्ति में डूबा यह महापर्व, नहाय-खाय से लेकर उषा अर्घ्य तक, आस्था और विश्वास का एक अटूट संगम है।

नहाय-खाय: शुद्धि का संकल्प
छठ महापर्व का पहला दिन, जहाँ व्रती पवित्र स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। यह मन और शरीर की शुद्धि का पावन आरंभ है।
शुद्धि अनुष्ठान

खरना: मन का उजियारा
दिन भर निर्जला उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद बनता है। यह दिन पूर्ण एकाग्रता और माँ की भक्ति का प्रतीक है।
भक्ति साधना

संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को नमन
नदी तट पर दउरा सजाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह जीवन के चक्र और कृतज्ञता को समर्पित एक भावुक क्षण है।
सांध्य वंदन

उषा अर्घ्य: नई आशा का उदय
उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन होता है। यह नई ऊर्जा, सुख और समृद्धि के आगमन का पावन संदेश लेकर आता है।
भोर वंदन
छठी मईया की भक्ति और आस्था
डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते व्रतियों, नदी घाटों के दीपों और दउरा की मंगलमय झलकियों का सुंदर संकलन।

डूबते सूर्य को अर्घ्य
संध्या बेला में नदी के तट पर आस्था का अद्भुत संगम और शांतिपूर्ण वातावरण।

भोर की मंगल बेला
उषा अर्घ्य के साथ नई आशा और खुशियों का आगमन, घाटों पर गूँजती जयकार।

घाटों पर दीपमाला
घाट-घाट गूँजे तेरी जयकार, हर आँगन में हो खुशियों की बहार।

दउरा और प्रसाद
शुद्धता और श्रद्धा के साथ तैयार की गई पूजा सामग्री और दउरा की सजावट।

सामूहिक प्रार्थना
जाति-धर्म की दीवारें भूलकर, आज दिल मिले हैं हाथों से हाथ मिलाकर।
परदेस में भी गूँजे माँ की पुकार
घर से दूर बैठे अपनों के लिए, छठी मईया की भक्ति और प्रसाद की यादों को संजोने का एक छोटा सा प्रयास। आइए, इस पावन पर्व पर हम सब एक साथ जुड़ें।
माँ का आशीर्वाद
दूर रहकर भी माँ छठी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें और ऑनलाइन दर्शन का लाभ उठाएं।
प्रसाद की स्मृति
परदेस में रहकर भी घर के बने प्रसाद और माँ के हाथों के स्वाद को यादों में संजोकर रखें।
सामुदायिक जुड़ाव
दुनिया भर में फैले छठ व्रतियों से जुड़ें और अपनी संस्कृति की खुशियों को साझा करें।
छठी मईया, सुन लो पुकार, तेरे चरणों में संसार। डूबते सूरज को अर्घ्य चढ़ाएँ, उगते सूरज से जीवन पाएँ।